सारे चक्रों में परमानन्द
संपादकीय द्वारा मीना ओम
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व्यूज
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मीना ओम कहती हैं कि कामुकता शारीरिक मिलन के लिए कोई दबाव या विशेषण नहीं है;
यह तो मानव विकास का एक अभिन्न अंग है।
यह तो मानव विकास का एक अभिन्न अंग है।
ब्रह्मांड सृजन, पूर्णता और विध्वंस के लिए परस्पर बुना और जुड़ा हुआ है।
इसमें मौजूद हर एक चीज़ की इसके निरंतर विकास में अपनी एक भूमिका है।
कुछ भी तुच्छ नहीं है।
जब हम सभी उपलब्ध शक्तियों का अधिकतम इस्तेमाल कर चुके हों,
ज्ञान और भावी विकास के संकेत प्राप्त करते हुए,
केवल तब ही हमें और ज़्यादा शक्ति प्राप्त होती है।
इसमें मौजूद हर एक चीज़ की इसके निरंतर विकास में अपनी एक भूमिका है।
कुछ भी तुच्छ नहीं है।
जब हम सभी उपलब्ध शक्तियों का अधिकतम इस्तेमाल कर चुके हों,
ज्ञान और भावी विकास के संकेत प्राप्त करते हुए,
केवल तब ही हमें और ज़्यादा शक्ति प्राप्त होती है।
प्रेरक शक्ति
सच्चा प्यार सार्वभौमिक जीवन ऊर्जा है-
सेक्स के पीछे सर्वोच्च प्रेरणा शक्ति मुक्ता,
शारीरिक मिलन के लिए कोई दबाव या विशेषण नहीं है;
यह हमारे अन्दर बह रहे प्राण से निर्देशित ऊर्जा का एक धक्का सा है,
जो हमें सारे चक्रों या ऊर्जा कुंडों पर परमानन्द अनुभव करने हेतु सक्षम बनाता है।
पूर्ण संतोष की प्राप्ति ही परमानन्द है।
सृजन के मज़े का चरमोत्कर्ष केवल मूलाधार या मूल चक्र के लिए ही बस नहीं होता।
सेक्स के पीछे सर्वोच्च प्रेरणा शक्ति मुक्ता,
शारीरिक मिलन के लिए कोई दबाव या विशेषण नहीं है;
यह हमारे अन्दर बह रहे प्राण से निर्देशित ऊर्जा का एक धक्का सा है,
जो हमें सारे चक्रों या ऊर्जा कुंडों पर परमानन्द अनुभव करने हेतु सक्षम बनाता है।
पूर्ण संतोष की प्राप्ति ही परमानन्द है।
सृजन के मज़े का चरमोत्कर्ष केवल मूलाधार या मूल चक्र के लिए ही बस नहीं होता।
हमारे पास सात केन्द्र होते हैं जहां इस पूर्ण संतोष का अनुभव किया जा सकता है;
हम चरमोत्कर्ष तक केवल सच्चे प्यार के बल पर पहुँच सकते हैं,
निरंतर ध्यान या एकाग्रता से स्फूर्ति प्राप्त कर के।
मानव बुद्धि संवेदनशीलताओं और क्षमताओं को सही दिशा देने हेतु
विचारों को व्यवस्थित, अनुशासित और दुरुस्त कर सकती है।
केवल शारीरिक संतुष्टि, वासना बन जाती है और
ऐसे में कोई भी उच्च स्तर प्राप्त करने से वंचित हो सकता है।
अर्थात् ब्रह्मांड के साथ पूरी तरह लयबद्ध होते हुए
पूर्ण अवस्था या पूर्ण चेतना तक पहुंचना।
हम चरमोत्कर्ष तक केवल सच्चे प्यार के बल पर पहुँच सकते हैं,
निरंतर ध्यान या एकाग्रता से स्फूर्ति प्राप्त कर के।
मानव बुद्धि संवेदनशीलताओं और क्षमताओं को सही दिशा देने हेतु
विचारों को व्यवस्थित, अनुशासित और दुरुस्त कर सकती है।
केवल शारीरिक संतुष्टि, वासना बन जाती है और
ऐसे में कोई भी उच्च स्तर प्राप्त करने से वंचित हो सकता है।
अर्थात् ब्रह्मांड के साथ पूरी तरह लयबद्ध होते हुए
पूर्ण अवस्था या पूर्ण चेतना तक पहुंचना।
यौन ऊर्जा अनुक्रम
कामुकता जीवन शक्ति का वार्तालाप है,
और मानव विकास व्यक्तिगत गुणों और लक्षणों के अनुसार होता है।
यौन ऊर्जा और शक्ति का आरोही क्रम इस प्रकार है:
और मानव विकास व्यक्तिगत गुणों और लक्षणों के अनुसार होता है।
यौन ऊर्जा और शक्ति का आरोही क्रम इस प्रकार है:
मूलाधार चक्र: शरीर के बेकार तत्वों के निर्गमन
और नए जीवन की रचना पर केंद्रित होता है।
इसका सम्बन्ध मूल प्रवृत्तियों के साथ होता है। यदि यौन ऊर्जा यहीं सीमित हो जाए,
तो हमारा अस्तित्व पशुता में है। मनुष्य सारा वर्ष यौन रूप से सक्रिय रहते हैं जबकि
जानवरों में इसकी कामना मौसमी होती है। इसलिए,
हमें इस क़ीमती प्रवाह की सौगात मिली है
ताकि यह महान रचनात्मकता और विकास में फलित हो सके।
और नए जीवन की रचना पर केंद्रित होता है।
इसका सम्बन्ध मूल प्रवृत्तियों के साथ होता है। यदि यौन ऊर्जा यहीं सीमित हो जाए,
तो हमारा अस्तित्व पशुता में है। मनुष्य सारा वर्ष यौन रूप से सक्रिय रहते हैं जबकि
जानवरों में इसकी कामना मौसमी होती है। इसलिए,
हमें इस क़ीमती प्रवाह की सौगात मिली है
ताकि यह महान रचनात्मकता और विकास में फलित हो सके।
स्वदिष्ठान चक्र: यहां ऊर्जा काम के प्रदर्शन को बढ़ाता है।
जब मुख्य कार्यकारी अधिकारीगण,
नेतागण और उद्यमीगण अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हैं,
वे काम बेहतरीन होने के परमानंद का अनुभव करते हैं।
जब मुख्य कार्यकारी अधिकारीगण,
नेतागण और उद्यमीगण अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देते हैं,
वे काम बेहतरीन होने के परमानंद का अनुभव करते हैं।
मणिपुर चक्र: आपके यहाँ उच्च भाव में होने का सम्बन्ध पूर्व में
अज्ञात ज्ञान प्राप्त करने या साकार करने के बारे में है।
वैज्ञानिक, अन्वेषक और शंकराचार्य स्वामीगण इसका अनुभव करते हैं।
अज्ञात ज्ञान प्राप्त करने या साकार करने के बारे में है।
वैज्ञानिक, अन्वेषक और शंकराचार्य स्वामीगण इसका अनुभव करते हैं।
अनाहत चक्र: ह्रदय से सम्बंधित, यह तब होता है जब
सब के प्रति, बेशर्त प्रेम की विस्फोटक भावना महसूस होती है,
जैसा कि सूफ़ी और संत जन अनुभव करते हैं।
सब के प्रति, बेशर्त प्रेम की विस्फोटक भावना महसूस होती है,
जैसा कि सूफ़ी और संत जन अनुभव करते हैं।
विशुद्धि चक्र: यह तब होता है जब आप आनंद भाव या परम सुख महसूस करें,
जो उपजता है भाषण कौशल, भाषण देने और ज्ञान साझा करने की महारत से,
जैसा कि महान नेताओं, शिक्षकों, गुरुओं और स्वामियों द्वारा किया जाता है।
जो उपजता है भाषण कौशल, भाषण देने और ज्ञान साझा करने की महारत से,
जैसा कि महान नेताओं, शिक्षकों, गुरुओं और स्वामियों द्वारा किया जाता है।
आज्ञा चक्र: तीसरी आंख है। इसमें, परमानंद,
पूरी तरह से विकसित अंतर्ज्ञान और स्पष्ट दृष्टि की वजह से होता है
जैसा कि दूरदर्शी और रहस्यवादी महसूस करते हैं।
पूरी तरह से विकसित अंतर्ज्ञान और स्पष्ट दृष्टि की वजह से होता है
जैसा कि दूरदर्शी और रहस्यवादी महसूस करते हैं।
बिन्दू विसर्ग: लंबी छलांग का बिंदु है। यह स्वयं के सच को जानने का शिखर है।
कोई स्वयं के साथ बेहद ख़ुश है, बिना किसी ऊब या तनाव के,
कैसी भी परिस्थिति में महाआनंदित।
प्रबल भाव प्रकृति की सबसे खूबसूरत रचना होने के लिए पूर्णतः आभार की होती है।
इस तरह के व्यक्ति में ज़ेन गुरुओं और परमहंसों की तरह
पुरुष और महिला की संतुलित ऊर्जाएं होती हैं।
कोई स्वयं के साथ बेहद ख़ुश है, बिना किसी ऊब या तनाव के,
कैसी भी परिस्थिति में महाआनंदित।
प्रबल भाव प्रकृति की सबसे खूबसूरत रचना होने के लिए पूर्णतः आभार की होती है।
इस तरह के व्यक्ति में ज़ेन गुरुओं और परमहंसों की तरह
पुरुष और महिला की संतुलित ऊर्जाएं होती हैं।
सहस्रार चक्र या क्राउन चक्र: उच्चतम संभोगीय-सुख है।
यहाँ पर कोई भी, सहस्रार से पूरी सृष्टि के साथ विलय (योग) का परमानंद और
एहसास का अनुभव करता है।
यह पूर्णतः एकत्व महसूस होने का परमानंद पवित्र और शुद्ध है।
जो भी चुना हुआ, सहस्रार अवस्था तक पहुँच जाता है,
वह भोग और लगाव के बिना आसानी से सभी चक्र पर रह सकता है।
इस तरह का कोई व्यक्ति विकास के उच्चतम बिंदु, अवतार को पा लेता है।
यहाँ पर कोई भी, सहस्रार से पूरी सृष्टि के साथ विलय (योग) का परमानंद और
एहसास का अनुभव करता है।
यह पूर्णतः एकत्व महसूस होने का परमानंद पवित्र और शुद्ध है।
जो भी चुना हुआ, सहस्रार अवस्था तक पहुँच जाता है,
वह भोग और लगाव के बिना आसानी से सभी चक्र पर रह सकता है।
इस तरह का कोई व्यक्ति विकास के उच्चतम बिंदु, अवतार को पा लेता है।
इन सभी पारिभाषिक शब्दों को एक सटीक व्याख्या की आवश्यकता होती है,
जो केवल अनुभव का ही परिणाम हो सकता है और
सिर्फ़ अर्जित ज्ञान पर आधारित नहीं होता।
जो केवल अनुभव का ही परिणाम हो सकता है और
सिर्फ़ अर्जित ज्ञान पर आधारित नहीं होता।
जागृत मार्ग
सच्चे भाव से कर्मण्य रहना एक जागृत मार्ग है जो लगातार
मानव जीवन के रहस्यवादी आयाम सामने लाता है।
ब्रह्माण्ड स्वयं को और अन्य ब्रह्मांडों को स्वयं के ही आनंद (कामुकता) और
सच्ची सुन्दरता (अध्यात्म) के लिए उत्पन्न करता है-
हम एकता और सार्वभौमिकता की भावना लिए
ब्रह्माण्ड की तरह कर्म करना सीख सकते हैं।
मानव जीवन के रहस्यवादी आयाम सामने लाता है।
ब्रह्माण्ड स्वयं को और अन्य ब्रह्मांडों को स्वयं के ही आनंद (कामुकता) और
सच्ची सुन्दरता (अध्यात्म) के लिए उत्पन्न करता है-
हम एकता और सार्वभौमिकता की भावना लिए
ब्रह्माण्ड की तरह कर्म करना सीख सकते हैं।
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